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रविवार, 10 फ़रवरी 2019

प्रेम वेडा

प्रेम वेडा 

वो सपना जो हमने देखा था 
वो सपना तुट के बिखर गया 

सपना मेरी मोहब्बत का था 
बरसो पहले लगी लगन का था 
वो सपना तुट के बिखर गया 

उम्रभर साथ देगी ऐसा  सोचा था 
उस फुल का सुगंध मेरे नसीब में नहीं था 
वो सपना तुट के बिखर गया 
,
बचपन की दोस्त के साथ शादी बनना था 
लेकिन मेरा  ilu कहना उसको मंजूर नहीं  था 
वो सपना तुट के बिखर गया 

उसके गांव में हर शाम जाना बस एक बहाना था 
लव का जिक्र होने के बाद मिला था 
उस मिलन में मेरे प्यार का मीठा हसना था 
वो सपना तुट के बिखर गया 

रो डालती वो ओर उसकी याद 
जब भी कोई जिक्र करता था 
उस सच को एक साल पहले छोड दिया था 
फिरसे, वो सपना तुट के बिखर गया 

वो सपना जो हमने देखा था 
वो सपना तुट के बिखर गया

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